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1
إِذَا جَآءَ نَصْرُ ٱللَّهِ وَٱلْفَتْحُ
ʹIẓaa jaaaʹa NAṢRUL LAAHI wal-Fatḥ,
(ऐ नबी!) जब अल्लाह की सहायता एवं विजय आ जाए।
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2
وَرَأَيْتَ ٱلنَّاسَ يَدْخُلُونَ فِى دِينِ ٱللَّهِ أَفْوَاجًا
Waraʹaytan naasa yadkhuloona fee Deenil laahi ʹafwaajaa,
और आप लोगों को देखें कि वे अल्लाह के धर्म में दल के दल प्रवेश कर रहे हैं।
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3
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَٱسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابًۢا
Fasabbiḥ bi-Ḥamdi Rabbika wastag̣firh. ʹInna-Hoo kaana Tawwaabaa.
तो आप अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का वर्णन करें और उससे क्षमा माँगें, निःसंदेह वह बहुत तौबा क़बूल करने वाला है।